Sunday, 29 September 2019

क्या आप जानते हो 9 के 9 नवरात्रे क्यो करने चाहिये। Navratre karne ke mahtav| hame navratre kyu karne chaiye

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हेलो दोस्तो कैसे हो आप सब आप सभी को तो पता ही होगा आज से नवरात्रि आरम्भ हो चुके है आज हम इन्ही के ऊपर चर्चा करेंगे, माता के 9 के नों रूपो के बारे मे जानेंगे।

 

नवरात्र मैं जो भक्त जिस मनोभाव और कामना से श्रदापुरण विधि विधान के साथ माता की आराधना व पूजन करता है , उसी भावना और कामना के अनुसार माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि मैं देवी की नों दिनों की पूजा नवग्रहों के अनिष्ट प्रभाव को भी शांत रखती है, जिससे रोग और शोक दूर होते है। माता नों रूपो मैं भगतो के कार्य पूर्ण करती है, इसीलिए इनकी उपासना का क्रम नोँ दिन का होता हूं, नवरात्रि शब्द नों की संख्या का रहस्यात्मक बौद्ध कराता है। नोँ की संख्या अखण्ड अविकारी ब्रह्मस्वरूप हौ, जोनकभी खंडित नही होता है, इसीलिए नवरात्रि के नों दिनों व्रत व उपासना करने से3 रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है, तन मन, धन, आयु कीर्ति के साथ सैह ग्रहों के दोषों का निवारण होता है 

 

 

माता के नोँ रूप है

 1.) शैलपुत्री  2.) ब्रह्नचारिणी  3.) चंद्रघंटा  4.) कुष्मांडा  5.) स्कंदमाता  6.) कात्यायनी   7.) कालरात्रि   8.) महागौरी   9.) सिद्धिदात्री 


दोस्तो ये है माता के नोँ रूप जिनकी माता भगत उपासना करते है, अगर आप भी हो तो आप भी इनके रूपो की उपासना ओर पूजन करे इसका जरूर लाभ मिलेगा।

 

 अब माता के नोँ रूपो की विस्तार से बात करते है:-

 

 

1.) माँ शैलपुत्री (करती है कल्याण )

  माँ दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप मे पूजा जाता है। हिमलाय के घर पुतरु के रूप मे जन्म लेने के कारण इनका नामकरण शैलपुत्री के रूप मे हुआ। माँ शैलपुत्री का पूजन जीवन मे सफलता के उच्चतम स्तरों को पाने के लिए किया जाता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे सफलता के लिए सर्वोच्च शिखर पर पहुचने की शक्ति पर्वतकुमारी माँ शैलपुत्री प्रधान करती है। शैल पर्वत की चोटी ही शिखर है। चेतना का सर्वोच्च शिखर माँ शैलपुत्री की आराधना से भगतो को प्राप्त होता है, जिससे शरीर मे सिथित कुंडलिनी शक्ति जागृत होकर रोग, शोक रूपी दैत्यों के विनास करती है। 

 

 

2.) माँ ब्रह्नचारिणी ( दिलाती है सफलता )

  ब्रह्मचारिणी सर्वव्यापी ब्रह्माण्डीय चेतना का दूसरा सवरूप है व नवरात्रि के दूसरे डिब के रूप मे भगतो को आशीष देता है। ब्रह्म का अर्थ वह प्रमचेतना जिसका न तो कोई आदि है और न कोई अंत, जिसके पर कुछ भी नह है। ब्रह्नचारिणी के रूप मे भगत ध्यानमग्न होकर परमसत्ता की दिव्य अनुभूति नवरात्रि के दूसरे दिन करते हौ। माँ के ब्रह्मचारिणी सवरूप की आराधना करने वालों की शक्तियां अशिमित, अनन्त हो जाती यही फलस्वरूप दुखो से ऊपर उठकर वह जीवन के सुखों को प्राप्त करता है। सत, चित, आनंदमय ब्रह्म की प्राप्तउ कराना ही ब्रह्मचारिणी का स्वभाव है। 

 

 3.) माँ चंद्रघंटा ( नियंत्रित रखती है मन )  
चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन, घंटे के कंपन के समान मन की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा मैं परिवर्तित कर भक्तों के भाग्य को समृद्ध करती है। सफल व्यक्ति प्रायः अपने मन मे ही उलझा रहता हाइमन जे नकारात्मक विचार व ऊर्जा दुःखोंको बढ़ावा देती है। चन्दर हमारी बदलती हुई भावनाओ, विचारो का प्रतीक है, घण्टे का अभिप्राय मंदिर मे उपस्तिथ घण्टा व उसकी ध्वनि कंपन से उत्पन सकारात्मक ऊर्जा है। अस्त व्यस्त मानव मन जो विभिन्न भावो मैं उलझ रहता है माँ चंद्रघंटा की आराधना कर सांसारिक कस्तो से मुक्ति पाकर दैवीय चेतना का साक्षात्कार करता है। 

 

 

4.)   माँ कुष्मांडा ( देती है बुद्धि ) 
   कुष्मांडा की नवरात्रि के चौथे दिन आराध्ना कर भगत अपनी आंतरिक प्राणशक्ति को ऊर्जावान बनाते है। कुष्मांडा का अभिप्राय कददू से है। गौलाकर वृत्त की भांति प्राणशक्ति दिन रात भगवती की प्रेरणा से सभी जीव जंतु का कल्याण करती है। कददू प्राणशक्ति, बुद्धिमता और और शक्ति की वृद्धि करता है। कु का अर्थ है छोटा, उषम का अर्थ है ऊर्जा आउट अंडा का अर्थ है ब्रह्माण्डीय गोल। धर्मग्रंथो मैं मिलने वाले वर्णन के अनुसार अपनी मंद और हल्की सी मुस्कान मात्र से अंड को उत्पन करने वाली होने के कारण इन्हें कुष्मांडा कहा गया है। 

 

 

5.)  माँ स्कंदमाता ( है ज्ञान का प्रतीक )  
स्कंदमाता की आराधना नवरात्रि के पांचवे दिन करने से भक्त अपने व्यवहारिक ज्ञान की कर्म मैं परिवर्तित करते है। मान्यताओं कर अनुसार, देवी इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति और किर्या शक्ति का समागम है। जब ब्रह्मांड मैं व्याप्त शिव तत्व का मिलान इन त्रिशक्ति के साथ होता है, तो स्कंद का जन्म होता है। स्कंदमाता ज्ञान और किर्या के स्त्रोत, आरम्भ का प्रतीक मानी गयी है। सही दिशा न होने के कारण ज्ञान और पुरूसार्थ भी विफल हो जाते है। माँ स्कंदमाता की आराधना करने वालो को भगवती जीव  मैं सही दिशा मे ज्ञान का उपयोग कर उचित कर्मो द्वारा सफलता, सिद्धि प्रधान करती है। 

 

 

 6.)  माँ कात्यायनी ( दिलाती है विजय )
  कात्यायनी दिव्यता के अति गुप्त रहस्यों की प्रतीक है। व्यक्ति का भाग्य उसके आंतरिक अदृश्य जगत से संचालित होता है। वह जगत जो अदृश्य हौ, हमारी इंद्रिया जिसका अनुभव नही कर सकती और जो हमारी कल्पना से भी परे है, वही जगत माता कात्यायनी के प्रताप से सम्बंदित है। नवरात्रि के छठे दिन माँ के कात्यायनी रूप का ध्यान पूजन करने से भक्त के आन्तरिज सूक्ष्म जगत मैं चल रही नकारात्मकता का नाश होकर सकारात्मकता का विकास होता है।

 

 

7.)  माँ कालरात्रि ( करती है बाधाओं को दूर )
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि किंउपसन से प्रतिकूल ग्रहों द्वारा उत्पन की जाने वाली बाधाएं समाप्त होती है। और आप अग्नि, जल, जंतु, शत्रु आदि के भय से मुक्त हो जाते है। माँ कालरात्रि अपने भक्तों के लिए ब्रह्मांड कु सभी सिद्दियों की प्राप्ति के लिए राह खोल देती है। माँ का कालरात्रि स्वरूप अति भयावह व उग्र है, भयानक स्वरूप होने के बावजूद सुभ फल देने वाली माँ कालरात्रि नकारात्मक, तामसी, और राक्षशी, परवर्तियों का विनास कर भक्तो को दानव दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि से अभय प्रधान करती है। माँ का यह रूप वैराग्य और ज्ञान प्रधान करता है। 

 

 

8.) माँ महागौरी ( देती है सुख सम्पनता ) 
महागौरी की उपासना नवरात्रि के आठवे दिन करने से भक्त के जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते है। माँ भगवती का यह शक्ति विग्रह भक्तो को तुरंत और अमोघ फल देता है। भविष्य मे पाप संताप, निर्धनता, दीनता और दुख उसके पास नही फटकते। इनकी कृपया से साधक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्योक अधिकारी हो जाता है, उसे अलौकिक सिद्दियों की प्राप्ति होती है। माँ के इस रूप की स्तुति करने से मनुष्य की परवर्ती सत की ओर प्रेरित होती है और अस्त का विनाश होता है। 

 

 

 9.) माँ सिद्धिदात्री ( देती है सिद्धियां )

सिद्धिदात्री की नवरात्रि के नौंवे दिन पूजन, अर्चना से भक्त के जीवन मे अद्भुत सिद्दि और छमता पर्याप्त होती है जिसके फलस्वरूप पुर्णतः के साथ सभी कार्य सम्पन होते है। माँ सिद्धिदात्री की कृपया प्राप्त होने से सभी लौकिक व परालौकिक मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। सिद्धि संपूर्णता का प्रतीक है, इसीलिए सिद्धियां प्राप्त होने पर सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं बिना विघ्न के पूरी होती है। इस शक्ति विग्रह मैं माता दुर्गा अपने भक्तों को ब्रह्मांड की सभी सिद्धियां प्रदान करती है।   


तो दोस्तो कैसी लगी आपको ये जानकारी दोस्तो अगर आप सभी को ये सब जानकारी पसंद आई तो सहारे करे जिन लोगो को माता के बारे मे नही पता, बस अपना प्यार बनाये रखना, आप हो तो मैं हु।

।। धन्यवाद ।।


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